कुंमारसम्भव

कुछ दिन पहले ट्विटर पर श्रद्धा के एक ट्वीट से इस किताब के बारे में पता चला.. किंडल पर फ्री थी तो पढ़ना शुरू कर दिया.. कालिदास जी की कहानी का हिंदी अनुवाद है ये और इतना सुमधुर कि एक एक चित्र जीवंत हो उठता है.. कभी लगता है संस्कृत का अध्य्यन छोड़ना नहीं चाहिए …

पुस्तक समीक्षा- क्रांतिदूत

क्रांति दूत चंद्रशेखर आज़ाद से पहला परिचय हुआ विद्यालय में। नैतिक विज्ञान, हितोपदेश, राष्ट्रप्रेम को साक्षात करता हुआ एक चरित्र जो इतिहास के पन्नों से जीवंत सा होकर जिंदगी जीने का सलीका सिखा गया। आज़ाद के व्यक्तित्व में एक ऐसा आकर्षण था जो अभी तक मानस पटल से उतरा नहीं है। “आज़ाद हूँ आज़ाद रहूँगा” …

पुस्तक समीक्षा- समय अभी तक वहीं खड़ा है

“चार दिन जिंदगी है सुना था मगर तीसरा दिन गया है बिना बात के…” जिस प्रतियोगिता को जीतने का इरादा ना हो, उसमें अकारण 3 घंटे बैठना पड़े तो आँखे खिड़की के बाहर कहानियाँ तलाशती हैं। एक ऐसे ही दिन खिड़की के बाहर मैंने देखा गुलमोहर का पेड़। और 3 घंटे तक कल्पेश जी का …